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ALLERGY : EASY MANAGEMENT FOR ALL

Ayurvigyan with Dr.Swastik
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एलर्जी : ये आयुष उपचार अपनाएँ

एलर्जी किसी भी उम्र में हो सकती है, आपके परिवार में अगर किसी को एलर्जी है, तो यह आपको भी हो सकती है. यह भी हो सकता है कि आपके माता-पिता दोनों को ही एलर्जी हो, लेकिन आपको यह नहीं हो. हमारे बाहर के वातावरण का भी इस पर प्रभाव होता है. लाल रंग के चकत्ते, काले धब्बे, फुंसियां और दाग, ये सब एलर्जी का ही लक्षण हैं. अगर सही समय पर एलर्जी पर ध्यान न दिया जाए तो यह कभी कभी जीवन के लिए भी घातक हो जाती है. एलर्जी होने के कई कारण हो सकते हैं.

कैसे होती है ?

सही खानपान न होने से लेकर प्रदूषण और जीवनशैली तक हमें इस रोग से पीड़ित कर देती है. हवा से भी एलर्जी हो सकती है. पानी के साथ ही प्रदूषण युक्त हवा भी त्वचा को बैक्टीरिया के संपर्क में ले आती है, जिससे एलर्जी होने का खतरा रहता है. कभी-कभी कपड़ों पर इस्तेमाल होने वाला रंग यानी डाई त्वचा में एलर्जी पैदा कर देती है.

कैसे पहचाने?

एलर्जी को पहचानने का सबसे आसान तरीका यह है कि अगर आपकी त्वचा का रंग लाल हो रहा है या फिर उसमें खुजली हो रही है तो समझ लीजिए कि आप एलर्जी के शिकार हो रहे हैं.

लक्षण (Signs & Symptoms)

1.आंखों में खुजली, लाली, सूजन, जलन या पानी जैसा द्रव बहना.

2.सांस की नाली बंद हो जाना.

3.गले में खुजली, खांसी.

4.त्वचा पर खुजली और लाल चकत्ते पड़ना.

5.ब्लड प्रेशर कम हो जाना.

6.नाक में खुजली, नाक बंद होना और बहना.

7.छीकना और इसके बाद कभी-कभी दमे का दौरा पड़ना.

8.मुंह के आसपास सूजन या निगलने कठिनाई.

9.घरघराहट, सीने में जकड़न, जोर से साँस लेना या साँस लेने में कठिनाई.

10.गम्भीर एलर्जी की अवस्था में रोगी को बेहोशी भी होने लगती है.

किस तरह की एलर्जी हो सकती है (Forms of Allegry)

1.Allergic conjunctivitis- आंखों मे लाली, जलन व खुजली होती है. यह धूल, धुएं, सौंदर्य प्रसाधन से संबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल से कुछ लोगों में देखी जाती है.

2.Skin Allergy- इसमें Eczema व Urticaria नामक अवस्थाएं प्रमुख रूप से पायी जाती है। त्वचा पर लाल रंग के  चकत्ते उभर आते हैं। यह अक्सर अनजान कारणों से होती है.

3.Food Allergy- किसी भी खाद्य पदार्थों से यह हो सकती है.

कैसे पता करें (Diagnosis of Allergy)-

1.Skin Test- एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्वों की पहचान के लिए यह परीक्षण किया जाता है.

2.Blood Test- यह रक्त में उत्पन्न विशेष ’एंटीबॉडीज’ जो कि एलर्जी के लिए ज़िम्मेदार होते हैं उसकी पहचान के लिए किया जाता है.

एलर्जी से बचने के सामान्य उपाय (General Precautions in Allergy)

1.घर में ज़्यादा खुली हवा आने दें.

2.विटामिन बी, सी से युक्त भोजन लें.

3.लकड़ी का फर्नीचर में दीमक न लगने दें.

4.घर में कहीं भी धूल मिटटी इकट्ठी न होने दें.

5.अलमारियों की निश्चित समय पर सफाई करते रहें.

6.जिन लोगों को दूध से एलर्जी है वे सोया मिल्क ले सकते हैं.

7.वर्षाकालीन दिनों में घर और उसके आसपास गंदगी न पनपने दे.

8.जब भी आप घर से बाहर खाना खाएं तो उसके सारे घटक चेक कर लें.

9.एक दो महीने में एक बार पलंग के गद्दे हटाकर अच्छी तरह सफाई करें.

10.एलर्जी होने पर त्वचा को केवल पानी से धोएं। साबुन या फेसवॉश का प्रयोग न करें.

11.कुछ लोगों को पालतू जानवरों से एलर्जी होती है; इसलिए सुनिश्चित करें कि उससे दूर ही रहें.

12.अगर A.C. का प्रयोग करते हैं तो यह यह निश्चित करें कि कमरे में नमी कम हो और ए.सी. के फिल्टर कुछ  समय बाद बदलते रहें.

आधुनिक उपचार (Modern Treatment)

1.आमतौर पर अधिकाँश चिकित्सक एलजी में कई प्रकार की एलर्जी रोधक दवाओं का प्रयोग करते है। जैसे Cetrizine, Avil,  मोन्टेल्यूकास्ट Fexofenadine etc. यह सब दवाएं तत्काल प्रभाव में एलर्जी को रोक देती हैं. पर स्थायी रूप से इनसे भी आराम नहीं हो पाता है.

2.आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अभी एलर्जी का स्थायी उपचार तो नहीं है; लेकिन जिन चीजों से आपको एलर्जी है  उनसे बचा जाए तो आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं.

3.इम्युनो थेरेपी को कुछ प्रकार की एलर्जी का सबसे अच्छा और सुरक्षित उपचार माना जाता है; पर यह कुछ मंहगी चिकित्सा है और इसमें समय भी अधिक लगता है. हर किसी को इससे फायदा भी नहीं होता. इसमें एलर्जन के डोज दिए जाते हैं जिन्हें एलर्जी शॉट कहते हैं. शुरुआत में हर हफ्ते एक या दो शॉट लेने पड़ते हैं. धीरे धीरे इनकी संख्या घटकर महीने में एक कर दी जाती है.

एलर्जी से छुटकारा पाने का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक, अन्य उपचार (Ayurvedic, Naturopthic & Other Treatments)

1.रोज सुबह नींबू पानी पिएं.

2.खट्टी चीजों, मिर्च-मसालों से परहेज रखें.

3.डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवाएं लें.

4.चंदन, नींबू का रस बराबर मात्रा में मिला कर पेस्ट बना कर लगाएं.

5.प्राणायाम में ‘कपालभाती’ का नियमित प्रयोग एलर्जी से मुक्ति का सरल उपाय है.

6.एक या दो केले रोज खाएं; ऐसा हमारा अनुभव है कि केले खाने से चकत्ते कम पड़ते हैं.

7.जिसमें खीरे और चुकंदर का जूस एक एक कप और ३ कप गाजर के जूस में मिलाकर पीयें.

8.फिटकरी के पानी से प्रभावित भाग धोकर साफ करें फिर वहां कपूर और सरसों का तेल मिलाकर लेप लगाएं.

9.कॉड लिवर ऑयल व विटामिन ई (Cod Liver Oil & Vitamin-E oil) रात में सोते समय विटामिन ई तेल में कॉड लिवर ऑयल मिलाकर चकत्तों पर लगाएं.

10.तुलसी पत्ते को पीसकर इसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल, दो लहसुन के पीस , एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। इसे चकत्तों पर लगाएं; कुछ समय बाद साफ़ कर दें.

11.आयुर्वेदिक दवाई ‘सितोपलादि चूर्ण’ और हरिद्रा खंड एलर्जी के रोगियों में अच्छा प्रभाव दर्शाती है; अतः इसे योग्य चिकित्सक की देखरेख में लिया जा सकता है.

12.अगर आपके शरीर पर एलर्जी के कारण लाल चकत्ते पड़ गए हैं तो जैतून का तेल (Olive Oil) लगाने से आपको तुरंत आराम मिलेगा। खासतौर पर एलर्जी से होने वाली जलन और खुजली शांत करने में यह उपयोगी है.

13.आयुर्वेदिक पंचकर्म उपचार का एक प्रकार जिसे ‘नस्य’ कहते हैं. इसमें नाक में विशेष दवा को ड्रॉप्स की तरह से प्रयोग किया जाता है. यह चिकित्सक के परामर्श से प्रयोग करें. आपको लाभ मिलेगा.

14.अनेक रोगियों के इलाज़ में मेरा ऐसा अनुभव है कि प्राणायाम और आयुर्वेदिक इलाज़ के साथ यदि पंचकर्म (विशेषतः नस्य) भी करवाया जाय तो यह अनेक प्रकार की ‘एलर्जी’ से बचाव ही नहीं करती बल्कि उसे दूर भी कर देती है.

अगर आपके पास भी कोई ऐसा उपाय है तो उसे बताएं जिससे ज़्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके.

जनहित में यह जानकारी शेयर करें.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥

धन्यवाद !!!!

आपका अपना,

डॉ.स्वास्तिक

चिकित्सा अधिकारी

(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन)

(ये सूचना सिर्फ आपके ज्ञान वर्धन हेतु है. किसी भी गम्भीर रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद अथवा लेखक के परामर्श के बाद ही कोई दवा लें. पब्लिक हेल्थ के अन्य मुद्दों तथा जनहित के लिए सुझावों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है )

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